केडी हॉस्पिटल, मथुरा में एक महिला मरीज पॉट्स स्पाइन (स्पाइन टीबी) के कारण गंभीर अवस्था में पहुँची। पिछले लगभग 10 दिनों से मरीज को पीठ दर्द के साथ-साथ चलने और संतुलन बनाए रखने में भारी परेशानी हो रही थी। खासतौर पर बाएँ पैर में अत्यधिक कमजोरी थी, जिसके कारण वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। स्थिति लगातार बिगड़ रही थी, इसलिए मरीज को तुरंत केडी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती किया गया, जहाँ 24/7 न्यूरो इमरजेंसी सेवाएँ उपलब्ध हैं।

मरीज की जाँच वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक चौधरी, हेड ऑफ द डिपार्टमेंट (न्यूरो सर्जरी) द्वारा की गई। MRI जाँच में यह सामने आया कि मरीज की रीढ़ की हड्डी के L5-S1 स्तर पर हड्डी पूरी तरह गल चुकी थी। इसके साथ ही रीढ़ के दोनों ओर की नसों पर अत्यधिक दबाव था, जिसमें बाईं ओर की नस ज्यादा दबी हुई थी। MRI में यह भी पाया गया कि L5-S1 की ऊपर और नीचे की एंड प्लेट्स पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं और आगे व पीछे दोनों ओर पस जमा हो गया था, जिससे नसें बुरी तरह कंप्रेस हो रही थीं।

Pott's spine

इस गंभीर स्थिति के कारण मरीज अपने पैरों पर वजन नहीं डाल पा रही थी। कॉन्ट्रास्ट MRI में भी वही निष्कर्ष सामने आए। मरीज की हालत को देखते हुए केवल दवाइयों से इलाज संभव नहीं था। इसलिए डॉ. दीपक चौधरी की टीम ने सर्जरी का निर्णय लिया, ताकि नसों को दबाव से मुक्त किया जा सके और रीढ़ को स्थिरता दी जा सके।

सफल ऑपरेशन के दौरान L5-S1 स्तर पर लैमिनेक्टॉमी की गई और दायीं व बायीं दोनों नसों को पूरी तरह फ्री किया गया। इसके बाद L4-S1 स्तर पर स्क्रू डालकर फिक्सेशन किया गया, जिससे रीढ़ को मजबूती मिल सके। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। अब मरीज पहले की तुलना में बेहतर महसूस कर रही है और धीरे-धीरे चलने-फिरने में सक्षम हो रही है।

डॉ. दीपक चौधरी के अनुसार, यदि पॉट्स स्पाइन (स्पाइन टीबी) की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए, तो मरीज को सुन्नपन, कमजोरी या फोकल मोटर डिफिसिट जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। शुरुआती चरण में इस बीमारी का इलाज केवल एंटी-ट्यूबरकुलर दवाओं से भी संभव है। लेकिन देर से आने पर, जब नसों पर दबाव बढ़ जाता है और कमजोरी आ जाती है, तब सर्जरी जरूरी हो जाती है।

केडी हॉस्पिटल, मथुरा में अत्याधुनिक MRI, अनुभवी न्यूरो सर्जन और 24/7 न्यूरो इमरजेंसी सुविधाओं के कारण ऐसे जटिल मामलों का सफल इलाज संभव है। समय पर डॉक्टर से परामर्श और सही जाँच से स्पाइन टीबी जैसी गंभीर बीमारी को बिना ऑपरेशन भी नियंत्रित किया जा सकता है।

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