केडी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, मथुरा में  शेरा को गंभीर श्वसन संकट की अवस्था (न्यूमोथोरैक्स) में इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। शेरा की हालत बेहद नाजुक थी। अचानक सांस लेने में अत्यधिक परेशानी होने लगी थी और ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया था। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि मरीज बेहोशी की अवस्था में चले गए थे।

इमरजेंसी में भर्ती होते ही मरीज की जांच की गई, जहां सामने आया कि उन्हें न्यूमोथोरैक्स (फेफड़े में हवा भर जाना और फेफड़े का फट जाना) हो गया है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है यदि समय रहते इलाज न मिले। मरीज को तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर लिया गया ताकि उनकी सांसों को नियंत्रित किया जा सके और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को स्थिर किया जा सके।

Pneumothorax

जांच के दौरान किए गए एक्स-रे में स्पष्ट रूप से देखा गया कि फेफड़े में हवा भर चुकी थी और फेफड़ा पूरी तरह से नहीं फूल पा रहा था। इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. शुभम द्विवेदी की देखरेख में तुरंत आवश्यक प्रक्रिया शुरू की गई। फेफड़े में जमा हवा को निकालने और उसे दोबारा फैलाने के लिए मरीज की छाती में एक विशेष नली (चेस्ट ट्यूब) डाली गई। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक प्रक्रिया थी।

मरीज के वेंटिलेटर पर रहते हुए ही ब्रोंकोस्कोपी की गई। इस प्रक्रिया के माध्यम से फेफड़ों के अंदर मौजूद संक्रमण को साफ किया गया, जिससे सांस की नली खुल सकी और श्वसन प्रक्रिया में सुधार हुआ। समय पर की गई इस उन्नत प्रक्रिया का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि उसी दिन मरीज को वेंटिलेटर से सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया।

फिलहाल मरीज का फेफड़ा पूरी तरह से फैल सके, इसके लिए नली अभी भी लगी हुई है और डॉक्टरों की लगातार निगरानी में उनका इलाज जारी है। मरीज की हालत में अब पहले से काफी सुधार है और वे तेजी से रिकवरी की ओर बढ़ रहे हैं।

डॉ. शुभम द्विवेदी (इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट) के अनुसार, ऐसे मामलों में समय पर ब्रोंकोस्कोपी, चेस्ट ट्यूब डालना और आवश्यक इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी प्रक्रियाएं बेहद अहम होती हैं। यदि मरीज सही समय पर अस्पताल पहुंच जाए और तुरंत उचित उपचार मिल जाए, तो गंभीर से गंभीर श्वसन रोगों से भी मरीज को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है।

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